"भंवरी का भंवर जिसमे डूबे कई कँवर "
भंवरी के भंवर में और भी कई भंवरे है,
इसके सहारे कई लोग संवरे है,
देखते ही देखते कई लोग, इतने आगे बढ़ गए,
जरा पता लगाओ, ये किस सीडी से चढ़ गए
भ्रष्टाचारी, व्यभिचारी, अपराधी की गाड़ी हवा में दोड़ती है,
कितना भी नेक, ईमानदार इन्सान हो सबको पीछे छोडती है.
आज के सियासती दौर में, काम करवाने के यही रास्ते बचे है,
दे दे, दिला दे या फिर किसी को किसी से मिला दे.
वक़्त के अनुसार अपने आपको, बना लोगे तो तर जाओगे,
वरना पता भी नहीं चलेगा, और बिना मौत ही मर जाओगे.
आज मेरे देश में ऐसे लोगो का बोलबाला है
सच्चे, मेहनतकश, देशभंक्तों का 'यासीन' खुदा ही रखवाला है.
यासीन कायमखानी
मो- ९३१४६०६०८१
जयपुर
very nice poem.
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